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बिहार में सरकारी कर्मचारियों के लिए सोशल मीडिया पर लक्ष्मण रेखा तय, कैबिनेट से नई आचार नियमावली को मंजूरी

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पटना:डिजिटल दौर में प्रशासनिक अनुशासन को सख्ती से लागू करने की दिशा में बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में बिहार सरकारी सेवक आचार (संशोधन) नियमावली, 2026 को स्वीकृति दे दी गई। इस फैसले के साथ ही राज्य के सरकारी कर्मचारियों के सोशल मीडिया व्यवहार पर स्पष्ट और कड़े प्रतिबंध लागू हो गए हैं।
कैबिनेट बैठक में कुल 32 प्रस्तावों पर मुहर लगी, लेकिन प्रशासनिक हलकों में सबसे अहम फैसला यही माना जा रहा है। सरकार का मानना है कि सोशल मीडिया के अनियंत्रित इस्तेमाल से न केवल सरकारी कार्यप्रणाली प्रभावित होती है, बल्कि जनता के बीच भ्रम और अविश्वास की स्थिति भी पैदा होती है।
आधिकारिक पहचान के साथ सोशल मीडिया पर पूरी तरह रोक
संशोधित नियमों के तहत कोई भी सरकारी कर्मचारी अपने पदनाम, सरकारी ई-मेल, मोबाइल नंबर या किसी भी आधिकारिक पहचान के आधार पर सोशल मीडिया अकाउंट नहीं चला सकेगा। फेसबुक, एक्स (ट्विटर), इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, टेलीग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर निजी अकाउंट से भी ऐसी पोस्ट करना प्रतिबंधित रहेगा, जिससे सरकार की छवि को नुकसान पहुंचे या नीतियों पर नकारात्मक असर पड़े।
व्यक्तिगत अभिव्यक्ति पर शर्तें
नियमावली में यह स्पष्ट किया गया है कि कर्मचारी अपने निजी विचार रख सकते हैं, लेकिन यह स्वतंत्रता पेशेवर जिम्मेदारियों से टकरानी नहीं चाहिए। सरकारी नीतियों, फैसलों, प्रशासनिक प्रक्रियाओं या वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक टिप्पणी को नियमों का उल्लंघन माना जाएगा। गोपनीय दस्तावेजों और संवेदनशील जानकारियों के सार्वजनिक करने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा।
फर्जी और गुमनाम अकाउंट्स पर शिकंजा
सरकार ने छद्म नाम या फर्जी पहचान से सोशल मीडिया चलाने पर सख्त रोक लगा दी है। ऐसे अकाउंट्स से सरकारी अधिकारियों की आलोचना, भ्रामक जानकारी या उकसाऊ सामग्री साझा करना अब दंडनीय होगा। यह प्रावधान उन मामलों पर अंकुश लगाने के लिए लाया गया है, जहां गुमनामी के सहारे प्रशासन पर हमले किए जाते रहे हैं।
न्यायपालिका और संवेदनशील मामलों पर टिप्पणी वर्जित
नई नियमावली में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय या किसी भी अदालत के फैसलों पर टिप्पणी करने की मनाही की गई है। इसके अलावा यौन अपराध पीड़ितों की पहचान उजागर करना, सरकारी या राजनीतिक संगठनों के प्रतीकों का उपयोग, किसी बैठक या सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग तथा सोशल मीडिया के जरिए किसी भी प्रकार की आय अर्जित करना भी प्रतिबंधित रहेगा।
उल्लंघन पर कड़ी विभागीय कार्रवाई
सामान्य प्रशासन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र के अनुसार, पहले बिहार कर्मचारी आचार नियमावली में सोशल मीडिया को लेकर स्पष्ट प्रावधान नहीं थे, लेकिन अब 2026 के संशोधन के जरिए नियमों को औपचारिक रूप दे दिया गया है। नियमों का उल्लंघन करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की छवि और जन विश्वास पर जोर
सरकार का कहना है कि इन नियमों का उद्देश्य कर्मचारियों की अभिव्यक्ति पर रोक लगाना नहीं, बल्कि डिजिटल मंचों पर जिम्मेदार और मर्यादित व्यवहार सुनिश्चित करना है। नए प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू कर दिए गए हैं और सभी विभागों को इनके सख्त अनुपालन के निर्देश दिए गए हैं।
बिहार सरकार का यह फैसला प्रशासनिक अनुशासन, पारदर्शिता और जन विश्वास को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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